My happines is bound with me

 मेरे पास ऐसा कोई भी नहीं जिससे में बाते कर सकू, हर खुशी, हर दुख,हर वो चीज जिससे मुझे फर्क पड़ता है बता सकू।

जब भी रोता हूं ऐसा लगता है किसी का हात कंधे पर रखा हो और समझा रहा हो "की रो मत! में हूं ना "।हर शाम जब घर पर लोटा तो यही सवाल था कि जब कहने के लिए कुछ नहीं होता था तब सुनने वाले हजारों थे ,पर आज जब कहने के लिए इतना है तो सुनने वाला कोई नहीं।

हर शाम , हर वक्त यही अकेला पन जिसमें हम एक पल के लिए जीते रहते है।

हर वक्त किसी की आशा होती है ।। कोई आए जो मुझे समझे।कोई हो जिसे देखते ही मन मुस्कुरा उठे। मेरा हर दुख उससे ही सम्हले। 

ये सब अपेक्षाएं जब हम किसी से रखते है तो हमेशा भूल जाते है ,की हम हमारी खुशियो को किसी का गुलाम बना रहे है। हम खुशी कि वजह खोजते है और वजह मिल जाए तो ही खुश होते है। खुशी की ये वजह हमसे छीनी भी जा सकती है ये बात हमेशा भूल जाते है।हमारी खुशियों को हमने जैसे अपेक्षाओं के पिंजरे में कैद कर रखा है।

अपेक्षा पूरी होगी तो ही खुशी होगी।

अपेक्षाओं से अपनी खुशी को बांधके हमेशा भूल जाते है कि हमारे पास अभी कोई है जो हमेशा अपने साथ रहेगा भालेही पूरी दुनिया हमे अकेला छोड़ दे पर वो नहीं छोड़ेगा।।

मन में सवाल होगा की ये है कोन ।। जरूर जीवनसाथी ही होगा।।।

पर नहीं ये तो आयने के पीछे खड़ा वो शख्स है जो हमेशा आपके लिए खड़ा है।।। अगर खुशियों को वजह में तलाशोगे तो कभी कभी खुश होगे और वजह छीन जाने पर उतने ही दुखी।। 

खुश होने की कोई वजह मत खोजो ।। खुश रहो

खुश रहना तुम्हारा जन्मसिद्ध अधिकार है और इस अधिकार को किसी तरह की बेड़ियों में मत जकड़ो


-निखिल चव्हाण☺️

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